संक्षिप्त परिचय

मनुष्य की सबसे बडी विशेषता यह है कि वह एक सामाजिक प्राणी है। वह जहां भी रहता है, वहीं उसका एक सामाजिक संगठन गठित हो जाता है। भारत के औद्योगिक तीर्थों में से अन्तम भिलाई इसका एक जीवन्त उदाहरण है। यहां भारत के अलग-अलग राज्यों से आये हुए सभी जाति धर्मों के अपने अपने संगठन है जो उनकी" विशेष पहचान बनाए रखने में सहायक होते हैं। क्षत्रिय कल्याण सभा भी उनमें से एक है। देश के विभिन्न राज्यों से आए हुए क्षत्रिय समाज के लोगों का यह एक सामाजिक संगठन है। सम्भवतः यह 1979 की बात है। दूर-दूर से भिलाई आए हुए क्षतिय समाज के लोगो के बीच यह विचार जन्म लेने लगा कि यहां क्षत्रियों का एक सामाजिक संगठन बनाया जाना चाहिए ताकि सभी तरह के सामाजिक कार्यों के लिए उनके पास एक मंच हो जिससे सामाजिक रीति-रिवाजों का निर्वाह करने में एक दूसरे की सहायता की जा सके। कुछ लोगो ने अपने विचारों को संगठन का रुप देने की दिशा में प्रारंभिक कार्य का भी कर दिया था। आपस की चर्चाओं में यह जाहिर हुआ कि कई लोग इस इस दिशा मेंप्रयत्नशील हो चुके थे जिसका उद्देश्य एक ही था। अतः सबने मिलकर कार्य करने का निश्चय किया और इस सिलसिले में आर्य समाज के सभा कक्ष में एक बडी बैठक आहूत की गई।

1980 की यह बैठक बहुत महत्त्वपूर्ण रही। एक तदर्थ समिति का गठन किया गया जिसमें सर्व-सम्मति से श्री दिग्विजय सिंह - अध्यक्ष, श्री राणा प्रताप सिंह और आर.सी. सिंह - उपाध्यक्ष, श्री के.सी. सिसोदिया, श्री इन्द्र कुमार चौहाना और नवाब सिंह संयुक्त सचिव, श्री एन.पी.सिंह - कोषाध्यक्ष एवम श्री रमाशंकर सिंह, राज देव सिंह, शोभनाथ सिंह, डा. जी.एस. चौहान, राम भरोसे सिंह, जी.एन. सिंह, पद्म सिंह, आर.पी.साही, आर.एन. पाल व कैलाश सिंह तदर्थ समिति के सदस्य चुने गये।

इस समिति के सामने पहला कार्य था "विधिवत सदस्य बनाना" और दूसरा कार्य था "सभा के लिए विधान और नियमावली तैयार कर सभा का पंजीयन कराना"। 19 दिसम्बर 1980 को क्षत्रिय कल्याण सभा का पंजीयन रजिस्टार फ़ार्म्स एवं संस्थाएं, भोपाल द्वारा कर दिया गया। सभा का पंजीयन कराने के लिये भाई रनाशंकर सिंह जी की भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण रही।

 सभा को पंजीयन ( क्रमांक - 9687 ) प्रमाण पत्र प्राप्त हो जाने पर सदस्यता अभिमान में गति आयी, किन्तु यह बहुत सरल कार्य नहीं था क्योंकि कुछ समय से क्षेत्रियतर और ब्राम्हणेतर जातियां भी अपने नाम के सामने क्षत्रिय और ब्राम्हण जैसे ही जाति सूचक शब्द लिखने लगी है। अतः सदस्य बनाने से पहले व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लेना बहुत आवश्यक हो जाता था। चूंकि इस सभा में अलग-अलग स्थानों से आए हुए अलग-अलग विचार रखने वाले लोग पहली बार एक समाज के रुप में संगठित हो रहे थे, अतः कभी आपस में मत भेद हो जाना बहुत अस्वभाविक नहीं था, विशेष रुप से क्षत्रियों के अपने स्वभाव को देखते हुए। किन्तु अपनी विशिष्ठ पहचान स्थापित करने के लिये अपना सामाजिक संगठन सुदृढ बने यह विचार आपसी मतभेदों से अधिक प्रभावशाली सिद्ध होता रहा। श्री राणा प्रताप सिंह के सद प्रयासों से सभी तरह के गतिरोधों को समाप्त किया गया और 1984  में सेक्टर 1 पार्क में क्षत्रिय बंधुओं की एक आम सभा बुलाई गई। विधान के अनुसार एक नई समिति गठित की गई जिसमें श्री दिग्विजय सिंह - अध्यक्ष, श्री के.सी सिसोदिया और डा. जी.एस. चौहान - उपाध्यक्ष, श्री नवाब सिंह महासचिव, श्री कमलाकर सिंह- सह स़चिव और श्री राम नगीना सिंह - कोषाध्यक्ष, श्री राम देव सिंह, श्री राम सिंह और एस.एस. गौतम - संगठन मंत्री चुने गये। समिति के शेष सदस्यों के रुप में श्री के.पी. सिंह, राज्यपाल सिंह, दिवाकर सिंह, जनार्दन सिंह, हरिद्वार सिंह, बेचन सिंह, सुनीत कुमार सिंह, इन्द्र सेन सिंह, अभयराज सिंह और एस.एस. सिंह सर्व सम्मति से चुने गये।

इस समिति के तत्वाधान में 13 अप्रेल 1984 को एक वृहत सम्मेलन का आयोजन किया गया। सेक्टर 6 विश्राम गृह के प्रांगण में आयोजित उस सम्मेलन में क्षत्रिय बंधु पहली बार सपरिवार बहुर बडी संख्या में उपस्थित हुए। क्षत्रिय बंधु को उतनी बडी संख्या में एक स्थान पर उपस्थित कर पाना हमारी बहुत बडी सफ़लता थी। विचार मंच पर न केवल पुरुष प्रतिनिधियों ने, बल्कि महिला तथा छात्र प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस बीच सभा के लिए भिलाई इस्पात संयंत्र से भू-खण्ड प्राप्त करने में कई तकनीकी समस्याएं सामने आ रही थी, किन्तु उन्हे सुलझा लिया गया। इस कार्य में हमें भाई गिरिजा शंकर सिंह सुधिर सिंह गहरवार से हमें बहुत सहायता मिली। सभा के लिये भिलाई इस्पात संयंत्र से भू-खण्ड आबंटित करा पाने में उनसे मिली सहायता के लिये सभा उनके प्रति आबार व्यक्त करना अपना कर्तव्य समझती है।

भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा सभा के लिये सेक्टर 7 और गैरेज और पेट्रोल पंप के बीच भू-खाण्ड आबंटित करा दिये जाने के बाद वहां विधिवत भूमि पूजन कर महाराणा प्रताप भवन का निर्माण करने का संकल्प लिया गया। भाई अमरीश सिंह भवन निर्माण निदेशक बनाए गए।

भाई अमरीश सिंह ने महाराणा प्रताप भवन का विस्तृत रुपांकन तैयार किया, किन्तु भवन निर्माण का कार्य प्रारंभ करने से पहले भूमि का अच्छी तरह सर्वेक्षण करने पर पाया गया कि वहां से एक जल निकास पाइप लाईन जा रही थी, अतः संयंत्र से दूसरा वैकल्पिक भू-खण्ड आबंटित करने का अनुरोध किया गया। वैकल्पिक भू-खण्ड हमें सेक्टर 7  पेट्रोल पम्प के सामने सडक के दूसरी ओर मिला। यह एक अधिक सुविधाजनक भू-खाण्ड साबित हुआ।

सभा का निरन्तर विस्तार होता जा रहा था। इसके कार्यों को ठीक ढंग से आगे बढाने के लिये 22-01-1989 को जुबली पार्क सेक्टर 6  की आम सभ में एक कार्य-कारिणी समिति गठित की गई जिसमें पूरे भिलाई क्षेत्र को कई क्षेत्रों में बांट कर हर क्षेत्र से प्रतिनिधि ले कर नया प्रयोग किया गया। नई कार्य-कारिणी में निम्नलिखित क्षत्रिय बंधु सर्व सम्मति से चुने गये।

 के.सी. सिसोदिय  अध्यक्ष
 नरेन्द्र बहादुर सिंह  उपाध्यक्ष
 राम सिंह  उपाध्यक्ष
 श्याम सुंदर सिंह गौतम  महासचिव
 जे.पी. सिंह  संयुक्त महासचिव
 पी.पी. चौहान  संगठन सचिव
 आर. एन. सिंह  कोषाध्यक्ष
 चंदन सिंह भदोरिय  सचिव
 बेचन सिंह  सचिव
 एस.एन. सिंह  सचिव
 राजेन्द्र सिंह  सचिव
 रामदेव सिंह  सदस्य
 जनार्दन सिंह  सदस्य
 हरिद्वार सिंह  सदस्य
 राजेश सिंह सिसोदिय  सदस्य
 दिवाकर सिंह  सदस्य
 एच.पी. सिंह  सदस्य
 उमेश सिंह  सदस्य
 जोगिन्दर सिंह  सदस्य
 नवाब सिंह  सदस्य

किन्तु यह प्रयोग बहुत    सफ़ल नही हुआ, इसलिए बाद में उसकी जगह तदर्थ समितियां बनाकर काम चलाना पडा।

12 अप्रेल 1991 को भिलाई इस्पात संयंत्र से दूसरा वैकल्पिक भू-खण्ड प्राप्त हो जाने पर प्रस्तावित महाराणा प्रताप भवन के निर्माण की तैयारी प्रारंभ कर दी गई। 28 अप्रेल 1991 को नये भू-खण्ड पर क्षत्रिय बंधुओं की एक सभा इस संदर्भ में आयोजित की गई और निकटस्थ चौक का नाम महाराणा प्रताप चौक घोषित कर दिया गया।

सभा के सामने अब सबसे बडी चुनौती महाराणा प्रताप भवन की महत्त्वकांक्षी योजना के लिये धन जुटाने और वास्तविक निर्माण कार्य प्रारंभ करने की थी। आज महाराणा प्रताप भवन एक आकार ले चुका है और क्षत्रिय बंधुओं का हर कार्य में सहयोग मिल रहा है। जिस तदर्थ समिति ने यह कार्य संभाला था, उसने एक टीम की तरह काम करते हुए सभा सभा के हिसाब किताब का अंकेक्षण कार्य पूरा कराया, महाराणा प्रताप भवन निर्माण्के लिये संसाधन जुटाया और सदस्यों की साधारण सभा की, दिनांक 16-10-1994  को बैठक आयोजित कर नई कार्यकारिणी समिति का करा दिया। नई कार्यकारिणी का विवरण इस स्मारिका में अलग से दिया गया है।

अगले वर्ष से महाराणा प्रताप भवन सामाजिक कार्यों के लिए उपलब्ध होने लगेगा, यद्यपि उस समय भी उसके बहुत से निर्माण कार्य बचे रहेंगे। भवन निर्माण की चुनौती से निपट लेने की स्थिति में आ जाने के बाद सभा को अपना ध्यान उन उद्देश्यों की ओर भी देना है जिसकी चर्चा सभा के पंजीकृत विधान में की गई है।

मानव हित, राष्ट्र हित, समाज हित और समुदाय हित, की उच्च कामना और भावना ने क्षत्रिय समाज के दूरदर्शी कर्मठ और स्वप्नद्रप्टा मनिशियों को अस्सी के दसक में क्षत्रिय कल्याण सभा के गठन के लिये प्रेरित किया जिसका प्रारंभिक नेतृत्व भिलाई इस्पात संयंत्र के सहायक महाप्रबंधक श्री दिग्विजय सिंह ने सम्भाला। इस समय क्षत्रिय समाज के पास न तो कोई अपना भवन था और ना कोई आबंटित जमीन। सभी के प्रयास से गैरेज के पास सेक्टर 7 में भूमि आबंटित हुआ परन्तु वह जमीन उपयुक्त नहीं था। एक बार पुनः भागीरथ प्रयत्न से स्टेशन के पास भिलाई इस्पात संयंत्र ने रनणीक स्थल पर पुनः भूमि आबंटित  की।- 1991 में भूमि आबंटन के साथ ही सदस्यता और भवन निर्माण का लक्ष्य सामने था। एक मुहिम चला कर आजीवन सदस्यता मेम स्वजातीय बंधुओं को जोडा गया इस अभियान ने समाज में नवचेतना का संचार किया।

’संघ शक्ति युगे-युगे’ की भावना ने स्वजातीय बंधुओं में अद्भुत शक्ति का संचरण करके हर के मन में ऎसे सामाजिक कर्तव्यबोध का शंखनाद किया जिसका सुखद परिणाम हुआ कि हर एक ने निर्माण के दायिय्व को अपनी सीमा में स्वीकार कर लिया और समाज के नव निर्माण का विकास रथ सरपट दौडने लगा। भिलाई का यह समाज पूरे बारत के क्षत्रिय समाज के लिये उदाहरण बन गया। यह सारी उपलब्धी समाज के कर्मठ, समर्पित, जागरुक और विकासोन्मुखी पदाधिकारियों और सदस्यों के सचेस्ट प्रयास से संभव हुआ।

1996 ई० में स्वजातीय बंधुओं के आर्थिक सहयोग से महाराणा प्रताप भवन पूरा हो गया। उसके बाद तो निर्माण का यह रथ चल पडा। परिसर में मां जगदम्बा मंदिर का निर्माण 2001 ई० में हुआ और तापेश्वर मंदिर का निर्माण भी सम्पन्न हुआ। 15 अक्टूबर 2002  को ज्योति कक्ष का निर्माण पूज्य पिता स्व. रणजीत सिंह माता स्व. श्रीमती कमला सिंह भ्राता स्व. श्री विनोद सिंह सिंह ग्राम रोहुआ जिला - बलिया उत्तर्प्रदेश की स्मृति में श्री संतोष ने करवाया। 2001 में राणावेनी माधव सिंह क्षत्रिय अनुसंधान केन्द्र कक्ष का निर्माण श्री राणावेनी माधव की स्मृति में श्रीमती विन्देश्वरी देवी पत्नी बद्री विशाल सिंह एवं पुत्र श्री शैलेन्द्र सिंह, ज्ञानेन्द्र सिंह पौत्र हर्षवर्धन सिंह, कीर्तिवर्धन सिंह, अभिषेक सिंह, अभिनव सिंह, मुक्त नगर दुर्ग ने करवाया।

स्व. सूर्यभान सिंह स्मृति धर्मशाला का निर्माण 2005 ई० में सम्पन्न हुआ और यह धर्मशाला का उदघाटन छत्तीसगढ विधान सभा अध्यक्ष माननीय प्रेम प्रकाश पाण्डेय ने करके उसे मा जगदम्बा सेवार्थ समर्पित किया इस धर्मशाला निर्माण में कई दान दाताओं ने तनम न धन से अपना उल्लेखनीय योगदान दिया जिसके नाम और योगदान निन्न है -

समाज की विकास यात्रा में वैसे तो सभी स्वजातीय बंधुओं ने अहम योगदान दिया परन्तु कुछ ऎसे नाम भी है जिन्होने अपने योगदान से समाज के विकास के इतिहास में अपना नाम रेखांकित किया वह नाम है :-

स. क्र. कक्ष क्रं. सहयोगी
1 बाबूजी हाल स्व. राणाप्रताप सिंह एवं श्री मती काली देवी, राणापरिवार नेहरु नगर पूर्व, भिलाई।
2 कक्ष क्रं. 1, 2, 3, 4, 5, 10, 11, 12 श्रीमती लाली देवी पत्नी स्व. सूर्यभान सिंह वत्स निवास, 600/33 स्मृति नगर, भिलाई।
3 कक्ष क्रं.  6 स्व. प्रभाग चन्द्र सिंह की स्मृति में पुत्र डी.सी. सिंह, राजपुताना सिंह बंधु निवास, खुर्सीपार, भिलाई।
4 कक्ष क्रं.  7 श्री मोतीलाल सिंह 16 डी एवेन्यू ए सेक्टर 6 भिलाई।
5 कक्ष क्रं. 8 श्री/श्रीमतीलाल चुन्नी वीरेन्द्र नाथ कुंवर सडक 2 बी प्रगति नगर, भिलाई
6 कक्ष क्रं.  9 स्व. कुबेर सिंह की स्मृति में पुत्र बलवीर सिंह न्यू शान्ति नगर, भिलाई।
7 कक्ष क्रं.  13 श्री / श्रीमती बृजमती रामाधार सिंह पौत्र आदित्य कुमार सिंह 5/54 नेहरु नगर पूर्व भिलाई।

स्व. राणा प्रताप सिंह, श्री रामभरोसे सिंह, श्री नवाब सिंह, श्री चंदन सिंह भदौरिया, श्री दिग्विजय बहादुर सिंह, श्री विश्राम सिंह, श्री लक्ष्मण प्रताप सिंह, श्री रामनगीना सिंह, श्री बद्री विशाल सिंह, श्री उदय नारायण सिंह, श्री कामेश्वर प्रसाद सिंह, श्री राजेन्द्र सिंह, श्री रामबहाल सिंह, श्री बी.एन. कुंवर, श्री बनवीर सिंह, श्री डी.सी. सिंह, श्री रामाधार सिंह, श्री मोतीलाल सिंह, श्री जगदीश प्रसाद सिंह, श्री हरिप्रसाद सिंह, श्री कृष्णपाल सिंह, श्री राघवेन्द्र नारायण सिंह पाल, स्व. भीखम सिंह, पंचानन सिंह, अमरीश कुमार सिंह राणा, अशोक कुमार सिंह।

क्षत्रिय कल्याण सभा भिलाई द्वारा क्षत्रिय पत्रिका का संपादन किया जाता रहा है जिसका संपादन डा. एस.एन. सिंह द्वारा प्रारम्भ हुआ इन्होने अपनी लेखनी से मानव जाति का उद्बव एवं क्षत्रिय वंश परम्परा, सिसोदिया वंश एवं मेवाढ राज्य के अलावा संपादन और लेखन द्वारा निरन्तर समाज को प्रेरणा देते रहे। इनके सहयोगी संपादक स्व. गंगा प्रसाद सिंह का भी क्षत्रिय पत्रिका के प्रकाशन में उल्लेखनीय योगदान रहा है। वर्तमान क्षत्रिय पत्रिका के प्रधान संपादक तेज प्रताप सिण्ह और संपादक में ड्क. तीर्थेश्वर सिंह श्री मुक्तेश्वर सिंह, अंबिका सिंह इस कार्य को निरंतर आगे बढा रहे हैं जिसकी अलख डा. सोमनाथ सिंह ने जगाई थी।

समाज के विकास का यह रथ अब सोपान दर सोपान विकास की हर मंजिलों को तय करता जा रहा है और भविष्य में भारत ही नही पूरे विश्व के स्वजातीय बंधुओं को एक सूत्र में बांधकर रहेगा ऎसा उनका स्वप्न है।

हमें विश्वास है कि एक दूसरे की सहायता करते हुए हम क्षत्रिय कल्याण सभा को भिलाई एवं आदर्श सामाजिक संगठन का रुप दे पाने में सफ़ल होंगे।